सुनील मिश्रा
हरिद्वार। गुरु नानक जयंती का पर्व 30 नवंबर सोमवार को मनाया जाएगा। गुरु पर्व का सिख धर्म में बहुत महत्व है। सिख धर्म के प्रवर्तक गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि के दिन हुआ था। अतः इस दिन को पूरे देश में गुरु पर्व प्रकाशोत्सव के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

30 नवम्बर को मनाये जाने वाले गुरु पर्व से ठीक एक दिन पहले पूरे देश और प्रदेशों में स्थित गुरुद्वारों को सिख धर्म के अनुयायियों द्वारा फूलों की सजावट करते हुए उन्हें बिजली की रंगीन झालरों से सजा दिए गए हैं क्योंकि इस वर्ष कोरोना वायरस का प्रकोप देश में फैला हुआ है जिसके चलते गुरु पर्व से कुछ दिन पूर्व शहर में निकाले जाने वाली प्रभात फेरी और शोभा यात्राओं को प्रशासन द्वारा इस बार पाबंद कर दिया गया है। आपको बता दें कि कार्तिक पूर्णिमा गुरु पर्व के दिन गुरुद्वारों में तड़के सुबह सवेरे से ही अखंड पाठ और शब्द कीर्तन का आयोजन शुरू हो जाएगा। सिख धर्म के लोग सुबह गुरुद्वारे जाकर गुरु दरबार में गुरु ग्रंथ साहिब के आगे अपना मत्था टेकते हुए गुरुवाणी का अनुश्रवण करेंगे। इस दिन परंपरा अनुसार गुरु नानक देव जी के अटूट लंगर का भी आयोजन किया जाता है जिसमें सभी लोग नीचे पंगत पर बैठकर भोग प्रसाद ग्रहण करते हैं। वहीं इस बार कोरोना के असर को देखते हुए गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए गुरु नानक पर्व को मनाए जाने का निर्णय लिया गया है।

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