मनोज सैनी
देहरादून। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हरिद्वार कुम्भ की उपेक्षा को लेकर बहुत दुखी है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते हुए बताया कि वह 27 जनवरी को वह #हरिद्वार_कुंभ की उपेक्षा को लेकर बहुत दु:खी हूँ, केंद्र सरकार व से छींटे डालकर तत्पश्चात मां गंगा का पूजन करके #राज्य_सरकार, दोनों दोषी हैं। मैं, 27 जनवरी को प्रातः #मां_गंगा के जल के कुछ छींटे अपने शरीर पर डालकर हर की पौड़ी पर गंगा जी का पूजन करूंगा और उसके बाद सभी अखाड़ों में जाकर #संत_महात्माओं को भी प्रणाम करूंगा, क्योंकि संत महात्मा व अखाड़े ही हमारे कुंभ के संरक्षक हैं, तो मैं उनके चरणों में प्रणाम करके इस संदेश को #केन्द्र_सरकार तक पहुंचाना चाहता हूं कि #कुंभ की उपेक्षा को सहन नहीं किया जा सकता है।
एक दूसरे ट्वीट में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने लिखा है कि आज एक उत्साहजनक खबर पढ़ी, #जोशीमठ से हिमालय दर्शन प्रारंभ। मैंने यह अभियान 2016 में प्रारंभ किया था, देहरादून हेलोड्रम व 4 और हैलीपैड्स का इस कार्य में उपयोग किया गया था, हमने फिक्स्ड विंग्स पर भी इस योजना को प्रारंभ किया था, प्रारंभिक रिस्पांस बहुत अच्छा था। लेकिन 2017 के बाद सब कुछ गड़बड़ा गया, यदि सरकार प्रोपर मार्केटिंग करे तो ये योजना #उत्तराखंड_पर्यटन को बहुत आगे बड़ा सकती है। खैर देर आये दुरुस्त आये, यह अभियान बहुत अच्छा है और #हिमालय हमारी संपदा है, हमारे पास मानवता की धरोहर के साथ हमारी संपदा भी है इसलिये उसकी प्रॉपर मार्केटिंग हमारा दायित्व है।
Trivendra Singh Rawat

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