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पूर्व भाजपा विधायक चैंपियन के पुत्र दिव्य प्रताप के 3 शस्त्र लाइसेंस निरस्त।

मनोज सैनी
हरिद्वार। जिला मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून की आख्या दिनांक 17 नवंबर 2025 के द्वारा अवगत कराया गया है कि दिनांक 15 नवंबर 2025 को श्री आर० यशोर्धन पुत्र श्री एस० रामस्वामी निवासी 102 पुराना मसूरी रोड थाना राजपुर की तहरीर पर मु०अ०सं० 217/2025 धारा-115(2)/351(1)/324(4) बी०एन०एस० बनाम अज्ञात पंजीकृत किया गया। विवेचना के दौरान बयान वादी व गवाह और सीसीटीवी फुटेज के अवलोकन से अभियुक्त दिव्य प्रताप सिंह पुत्र कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन निवासी रंगमहल कस्बा लंढौरा थाना कोतवाली मंगलौर, तहसील रुड़की जिला हरिद्वार हाल निवासी 14 ए लंढौरा हाउस मोहिनी रोड़ थाना डालनवाला, जिला देहरादून का नाम प्रकाश में आया, जिसके द्वारा उक्त घटना में वादी व पीड़ित निशान्त यादव का वाहन कार रोक कर उसके साथ मारपीट की गयी व अपने लाईसेंसी पिस्टल/रिवाल्वर दिखाकर डरा-धमका कर आतंकित किये जाने के साक्ष्य पाये गये हैं। अभियुक्त द्वारा अपने लाईसेंसी पिस्टल/रिवाल्वर का दुरूपयोग किया गया। विवेचना के दौरान मुकदमा उपरोक्त में धारा-126/352 बी०एन०एस० व धारा-30 आर्म्स एक्ट की बढ़ोतरी की गयी।
अभियुक्त दिव्य प्रताप सिंह उपरोक्त के नाम जनपद हरिद्वार में निम्न शस्त्र लाईसेंस जारी है।

1-शस्त्र नम्बर-2108/13 रिवाल्वर नं0 3107638-32 बोर

2-शस्त्र नम्बर 1909/13 रिवाल्वर नं0 75931-32 बोर

3-शस्त्र नम्बर 2104/13 बन्दूक नं0 148042 उपरोक्त प्रकरण की गंभीरता के दृष्टिगत लाईसेंस धारक दिव्य प्रताप सिंह पुत्र कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन निवासी रंगमहल कस्बा लंढौरा थाना कोतवाली मंगलौर, तहसील रुड़की जिला हरिद्वार हाल निवासी 14 ए लंढौरा हाउस मोहिनी रोड़ थाना डालनवाला, जिला देहरादून के उपरोक्त लाईसेंसो को निलम्बित/निरस्त किए जाने की संस्तुति की गयी है।
जिला मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित ने पुलिस आख्या का अध्ययन किया गया तथा आख्या के अध्ययन से समाधान हो गया की विपक्षी/दिव्य प्रताप सिंह के द्वारा शास्त्र लाइंसेंस/अनुज्ञाओं की शर्तों का उल्लंघन किया गया है। ऐसे में
जनसाधारण की सुरक्षा की दृष्टिगत विपक्षी/दिव्य प्रताप सिंह को जारी शस्त्र अनुज्ञाएँ निलम्बित कर निरस्त किया जाता है।
जिला मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून/हरिद्वार को निर्देश दिए ही कि कारण बताओ नोटिस की एक प्रति विपक्षी को हस्तगत करते हुए तामिलि आख्या सहित दूसरी प्रति जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय को समयांतर्गत प्रेषित करते हुए निलंबित शास्त्र अनुज्ञाओं को शास्त्र सहित अपनी अभिरक्षा में लेने के निर्देश दिए।

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