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डीआईजी (डिप्टी कमांडेंट) अमिताभ श्रीवास्तव निलंबन प्रकरण: वर्दी घोटाला सच है या साजिश?

मनोज सैनी
देहरादून। भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री धामी की जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत निदेशक/डिप्टी कमांडेंट होम गार्ड एवं नागरिक सुरक्षा को वित्तीय अनियमितताओं के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से मिलकर वर्दी, जूते और डंडे की खरीद में बाजरा भाव से 3 गुना अधिक दाम दिखाए, जिससे विभाग को वित्तीय नुकसान हुआ।
उत्तराखंड में होमगार्ड विभाग के डिप्टी कमांडेंट (DIG रैंक) अमिताभ श्रीवास्तव के निलम्बन के बाद कई सवाल आखिर खडे हो गये हैं। सबसे बड़ा सवाल यह हैं कि होमगार्ड विभाग में वर्दी घोटाला सच है या कोई साजिश?
विश्वस्तसूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उत्तराखण्ड अधिप्राप्ति नियमावली में पांच लाख के अधिक मूल्य की समस्त सामग्रियों की अधिप्राप्ति हेतु शासकीय अधिप्राप्ति पोर्टल
का उपयोग करके ई- टेंडरिंग पद्धति का पालन करना सभी अधिप्राप्ति इकाईयों के लिए अनिवार्य किया गया है। सवाल उठता है कि ई-टेंडर निकालने की लिखित स्वीकृति विभागाध्यक्ष द्वारा दी जाती है और इस खरीद मामले में भी विभागाध्यक्ष द्वारा लिखित स्वीकृति दी गई है। इसके साथ साथ ई-टेंडर को नियमानुसार सरकारी पोर्टल और दो अखबार में भी प्रकाशित कराया गया है। इतना ही नहीं ई-टेंडर के लिए स्क्रुटनी समिति का गठन भी विभागाध्यक्ष द्वारा किया गया है, जो उन्हीं निविदादाता के प्रकरणों पर विचार करती है जिनके द्वारा उसमें प्रतिभाग किया गया था। सवाल यह भी है कि क्या तकनीकी और वित्तीय निविदा मूल्यांकन रिपोर्ट को मूल्यांकन संवीक्षा समिति के सभी सदस्यों द्वारा साईन किया जाता है तो ज्ञात हुआ कि सभी उपस्थित सदस्यों द्वारा साईन भी किया गया। सवाल यह भी हैं कि क्या ई-टेंडर में न्यूनतम बोलीदाता एल-1 ऑनलाइन ही चिन्हित था या मूल्यांकन सवीक्षा समिति ने खुद से चिन्हित किया तो यह बात भी उठ रही है कि ऑनलाइन चिन्हित होता है और इसमे भी ऐसा ही हुआ। सवाल यह भी है कि क्या ई-टेंडर में सामग्री का निर्धारण मूल्यांकन संवीक्षा समिति के द्वारा किये जाने का अधिप्राप्ति नियमों में कोई प्रावधान है तो पता चला कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। सवाल यह भी हैं कि क्या ई-टेंडर में सामग्री का पूर्व निर्धारण स्थानीय सर्वे के आधार पर मूल्यांकन संवीक्षा समिति के द्वारा किये जाने का अधिप्राप्ति नियमों में कोई प्राविधान है तो जानकारों का कहना है कि ऐसा कोई प्राविधान नहीं है, परंतु सक्षम प्राधिकारी विभागाध्यक्ष द्वारा ऐसा किये जाने का निर्णय न्यूनतम बोलीदाता के पक्ष में क्रय आदेश जारी करने की स्वीकृति से पूर्व किया जाना औचित्यपूर्ण एवं तार्किक हो सकता है जो इस मामले में विभागाध्यक्ष ने नहीं किया? सवाल यह है भी है कि 7 सामग्री का ई-टेंडर निकला था और एक सामग्री स्लीपिंग बैग को छोडकर छह सामग्री की स्वीकृती हुई थी। 6 सामग्री को क्रय करने की स्वीकृति विभागाध्यक्ष द्वारा लगभग 28 दिनों बाद दी गई थी। सवाल यह भी है कि 28 दिनों तक इसकी स्वीकृति क्यों नहीं दी गई और आखिर जब सात सामग्री का ई-टेंडर उन्हीं की स्वीकृति से निकाला गया तो स्लीपिंग बैग को क्यों छोडा गया? जानकारी लगी है कि स्लीपिंग बैग की खरीद में ही सबसे बड़ा घोटाला किया जाना था।

विश्वस्त सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि विभागाध्यक्ष द्वारा आदेश जारी करने की स्वीकृति से पूर्व किया जाना औचित्यपूर्ण एवं तार्किक हो सकता है जो इस मामले में विभागाध्यक्ष ने नहीं किया? सवाल है कि सात सामग्री का ई-टेंडर निकला था। बताया जाता है कि एक सामग्री स्लीपिंग बैग को छोडकर छह सामग्री की स्वीकृती हुई थी और चर्चा है कि छह सामग्री को क्रय करने की स्वीकृति विभागाध्यक्ष द्वारा जूनियर अधिकारियों डिप्टी कमांडेंट राजीव बलूनी, लिपिक संवर्ग के एस के साहू, वित्त अधिकारी हेम कांडपाल से जांच क्यों कराई गई? इतना ही नहीं जब निविदादाता ने सामग्री की आपूर्ति और बिल देने शुरू कर दी तो क्या उस निविदा को निरस्त किया जा सकता है? और जब उक्त बिलों का भुगतान ही नहीं हुआ तो घोटाला कैसे?
सवाल यह भी है कि इस ई-टेंडर को कब, कईं और किसने निरस्त किया? तो मालूम चला कि ई-टेंडर को अक्टूबर 2025 के आखिरी सप्ताह में विभागाध्यक्ष ने कैंसिल किया? बताया जा रहा है कि उसका कारण ई-टेंडर सामग्री का अधिक मूल्याकंन होना बताया गया जबकि ऑनलाइन चिन्हित न्यूनतम बोलीदाता को क्रय आदेश की स्वीकृति विभागध्यक्ष ने ही पहले 28 दिनों के बाद फाइल पर पहले सात सामग्री के स्थान पर छह सामग्री को क्रय करने की स्वीकृति खुद लिखित में दी गई और अब खुद ही ई-टेंडर कैंसिल किया, तो सवाल खडे हो रहे कि ऐसे में इस सब में अमिताभ कहां से दोषी बना दिये गये?
जानकारी लगी है कि इससे पूर्व 2014 में भी एक साजिश के तहत अमिताभ श्रीवास्तव के खिलाफ जूनियर अधिकारियों से जांच करवाकर शासन को भेजी गई तो शासन ने उस जांच रिपोर्ट को निरस्त कर दिया। इसी प्रकार अब भी खरीद घोटाले का आरोप लगाकर जूनियर अधिकारियों से जांच कराई गई और उक्त जांच के आधार पर निलंबन किया गया। इससे स्पष्ट है कि डिप्टी कमांडेंट अमिताभ श्रीवास्तव के खिलाफ लगातार षड्यंत्र रचकर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है।

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