प्रभुपाल सिंह रावत
सिमडी (पौड़ी)। 5 अक्टूबर को जब विधायक महन्त दिलीप रावत घटनास्थल पर थे तो स्थानीय ग्रामीणों व पीड़ित लोगों में भारी आक्रोश व गुस्सा नजर आ रहा था। लोगों का कहना था कि पहाड़ों में सडकों की हालत किसी से छिपी नहीं है, बहुत बुरी तरह टूटी फूटी व जीर्ण-शीर्ण हालत है। सड़के ऊबड- खाबड व पैराफिट हल्की सामाग्री व मिट्टी से बने हैं जो कुछ भी वजन सहन नहीं कर पाते। आदमी के बैठने से ही सीमेंट बजरी झड़ने लगती है।स्वास्थ्य सेवाएं भी दम तोड़ रही हैं। कहीं एक्सरे मशीन, अल्ट्रासाउंड, रक्त परीक्षण व कर्मचारी नहीं हैं। सिर्फ ढकोसला व नगण्य नजर आती हैं। महिलाए भी काफी गुस्से में थी, वे वृद्धा पेंशन का भी जिक्र कर रही थी।वैसे ही हालत प्रधान मंत्री आवास योजना के हैं, न जाने ये योजनाए कहां गायब होती हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्यों के प्रति भी उदासीनता दिखायी दी व नाराजगी जाहिर कर रहे थे। हर कोई अपना पेट पालने व भ्रष्टाचार, घोटाले में माहिर व व्यस्त हैं।
इतना सुनने के बाद विधायक ये कहते सुने गये कि ज्यादा चौड़ा मत बनो व दादागिरी मत दिखाओ। क्या लोगों का अपने जनप्रतिनिधि से सवाल जवाब व समस्या बताना दादागीरी है? फिर तो समस्याए बताना ही व्यर्थ है।कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज को भी खूब खरी खोटी सुनाते देखे गये। उनके प्रति भी आक्रोश चरम पर था। उन्होनें मुख्य मंत्री को भी नहीं बख्शा। कहते आ रहे थे कि दस दस सरकारी वाहनों का काफिला लाकर क्या किया, घोषणा तो देहरादून में बैठे बैठे भी हो सकती थी। लोगों का कहना था कि अब वोट आपको व पार्टी को नहीं देना का मूड बना दिया है। आज वही परिवार जानता है जिस पर बुरी बीत रही है।यातायात व्यवस्था पर भी ग्रामीणों ने सवाल दागे, कहा कि ओवरलोडिग गाडियाँ चलती है, कोई देखने व पूछने वाला नहीं है।जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के कारण आज ये बुरे दिन देखने पड़ रहे हैं। लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। विधायक को काफी देर तक घेर के बहस हो रही थी।
अब क्या सुधार होगा ये तो बाद में ही बताया जा सकता है। अभी रोज रोज के भ्रष्टाचार, घोटाला, बलात्कार, भाई भतीजावाद आदि खबरों से लोग परेशान है व ऊब गये हैं। ये तो अभी भविष्य के गर्भ में है कि 2024 किस ओर ले जाता है।

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