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सरकारी /निजी स्कूलों के कार्यक्रम में भाजपा कार्यकर्ताओं की सूची पर सवाल, विपक्षी पार्टियों के विधायक तक किए नज़रअंदाज़।

 जनप्रतिनिधियों को बुलाने के निर्देश, बहादराबाद में ही करीब 150 नामों की सूची चर्चा में

सूची में निर्वाचित प्रतिनिधियों के बजाय राजनीतिक कार्यकर्ताओं के नाम होने का आरोप, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठी उंगली

ब्यूरो

हरिद्वार। प्रदेश सरकार के सेवा संकल्प अभियान के तहत 26 सितंबर से सरकारी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट विद्यालयों में आयोजित होने वाली भाषण एवं चित्रकला प्रतियोगिताओं को लेकर हरिद्वार में शिक्षा विभाग की ओर से भेजी गई कथित सूची ने नई बहस छेड़ दी है। विद्यालयों को जारी निर्देशों में संबंधित जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम में आमंत्रित करने की बात कही गई है, लेकिन दूसरी ओर बहादराबाद ब्लॉक में करीब 150 नामों की जो सूची विद्यालयों को भेजे जाने की बात सामने आ रही है, उसमें बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के नाम होने का आरोप है जो वर्तमान में निर्वाचित जनप्रतिनिधि नहीं हैं।

बताया जा रहा है कि प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी अमित चंद की ओर से जनपद के विद्यालयों को निर्देश जारी किए गए हैं। सवाल यह है कि जब सरकारी कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने की बात कही गई है तो फिर संबंधित सूची में ऐसे लोगों के नाम किस आधार पर शामिल किए गए, जो न ग्राम प्रधान हैं और न ही वार्ड सदस्य?

 

 

 

 

जनप्रतिनिधि या राजनीतिक कार्यकर्ता?

मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकारी विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रम के लिए राजनीतिक दल से जुड़े कार्यकर्ताओं की सूची तैयार करना शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है? आरोप है कि बहादराबाद ब्लॉक में अकेले करीब 150 नामों की सूची भेजी गई है और इनमें भाजपा से जुड़े कार्यकर्ताओं के नाम शामिल हैं।

यदि सूची में शामिल व्यक्ति निर्वाचित जनप्रतिनिधि नहीं हैं तो शिक्षा विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि उनके नाम चयनित करने का आधिकारिक आधार क्या रहा। क्या इसके लिए कोई शासनादेश, विभागीय दिशा-निर्देश अथवा निर्धारित मानक है?

मुस्लिम कार्यकर्ताओं को दरकिनार करने का भी आरोप

मामले में एक और सवाल राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि भाजपा से जुड़े मुस्लिम समाज के कार्यकर्ताओं को भी सूची में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि राजनीतिक कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया जाना था तो चयन की प्रक्रिया क्या थी और क्या सभी वर्गों को समान अवसर दिया गया?

सरकारी विद्यालयों में होने वाले कार्यक्रम किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं होते। ऐसे में शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि आमंत्रित अतिथियों के चयन में स्पष्ट, पारदर्शी और समान प्रक्रिया अपनाई जाए।

अब निगाहें शिक्षा विभाग के जवाब पर हैं। विभाग को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना होगा कि बहादराबाद में करीब 150 नामों वाली सूची किसने तैयार की, किस आधार पर तैयार की गई और उसमें निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अलावा राजनीतिक कार्यकर्ताओं के नाम शामिल किए गए हैं या नहीं। इन सवालों का जवाब सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी कि मामला महज प्रशासनिक सूची का है या सरकारी कार्यक्रम की प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों में वास्तव में कोई आधार है।

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