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श्री एम. श्रीधर बीएचईएल के निदेशक (मानव संसाधन) नियुक्त।

मनोज सैनी

हरिद्वार। सार्वजनिक क्षेत्र के इंजीनियरिंग और विनिर्माण उद्यम भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) के निदेशक मंडल में अपनी नियुक्ति पर, श्री एम. श्रीधर (57 वर्ष) ने निदेशक (मानव संसाधन) के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया है।

इससे पहले, श्री श्रीधर कॉर्पोरेट कार्यालय, नई दिल्ली में कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) के पद पर कार्यरत थे। जहां वे कॉर्पोरेट मानव संसाधन के कार्यों का नेतृत्व करते हुए बीएचईएल में प्रमुखतः एचआर नीतियों एवं रणनीतिक कार्मिक पहलों को आगे बढ़ा रहे थे।

श्री श्रीधर उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद के सीबीआईटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं। उन्होंने जेएनटीयू, हैदराबाद से सीएडी/सीएएम में एम.टेक तथा एक्सएलआरआई, जमशेदपुर से बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजीडीएम) भी किया है। उन्होंने 1990 में अभियंता प्रशिक्षु के रूप में बीएचईएल में अपना करियर शुरू किया। उनके पास विनिर्माण, वाणिज्यिक परिचालन, परियोजना निष्पादन, औद्योगिक संबंध, मानव संसाधन प्रबंधन एवं कॉर्पोरेट नीति के क्षेत्रों में 36 वर्षों से अधिक का व्यापक एवं बहुआयामी अनुभव है।

अपने गौरवमय करियर के दौरान, श्री श्रीधर ने बीएचईएल की हैदराबाद इकाई तथा कॉर्पोरेट कार्यालय में कई महत्वपूर्ण पदों को संभाला है। उन्होंने स्टीम टर्बाइन, गैस टर्बाइन एवं सेंट्रीफ्यूगल कंप्रेसर के विनिर्माण परिचालन के नेतृत्व, संविदा प्रबंधन, वाणिज्यिक, विपणन, उत्पादकता एवं प्रबंधन सेवाएँ, प्लानिंग एंड डेवलपमेंट, इरेक्शन एंड कंस्ट्रक्शन, केन्द्रीय प्रेषण तथा औद्योगिक संबंध जैसे कार्यों को संभाला है। कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) के रूप में पदोन्नत होने से पूर्व उन्होंने महाप्रबंधक एवं प्रमुख, कॉर्पोरेट मानव संसाधन के रूप में भी कार्य किया है।

कॉर्पोरेट कार्यालय में, श्री श्रीधर ने मानव संसाधन नीतियों के निर्माण एवं कार्यान्वयन, निष्पादन प्रबंधन प्रणालियों को सुदृढ़ करने एवं बीएचईएल के संगठनात्मक लक्ष्यों के अनुरूप रणनीतिक मानव संसाधन पहलों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विनिर्माण, वाणिज्यिक एवं मानव संसाधन क्षेत्र के व्यापक अनुभव ने उन्हें व्यावसायिक प्राथमिकताओं को कार्मिक-केंद्रित रणनीतियों के साथ प्रभावी ढंग से समन्वित करने में सक्षम बनाया है, जिससे उन्होंने संगठनात्मक उत्कृष्टता एवं परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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