मनोज सैनी
अयोध्या में राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले में ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हो गई है।एसआईटी की शुरुआती जांच के बाद रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपनी तरफ से चोरी और धोखाधड़ी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई है। बताया जा रहा है कि एफआईआर में आठ लोगों को नामजद किया गया है। रमाशंकर यादव (टिन्नू यादव), अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष और करुणेश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।एफआईआर के बाद आरोपी लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया गया है।
ट्रस्ट द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे में महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा या गोपाल राव जैसे बड़े नाम आरोपियों की सूची में नहीं है, जिनको विपक्षी दल लगातार चढ़ावा की चोरी पर घेर रहे हैं। वहीं विश्व हिन्दू परिषद ने कल ही एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी और कहा था कि इसकी जांच तेजी से पूरी करके फास्ट ट्रैक कोर्ट से हर रोज सुनवाई करवाकर दोषियों को सजा दी जाए।
बता दें कि राम मंदिर में एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। श्रीराम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। मौके की स्थिति, 150 से अधिक लोगों से पूछताछ, सीसीटीवी तथा मौजूदा व्यवस्था को रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया है। सबकी भूमिका का उल्लेख है लेकिन अभी सीधे तौर पर किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। विस्तृत रिपोर्ट में हर व्यक्ति की जवाबदेही तय हो सकती है।
करीब 21 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट में चढ़ावे की कथित चोरी के आरोपियों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों की अलग-अलग भूमिका का उल्लेख है। निर्माण, खरीदारी, नगद, आभूषण, रत्न चढ़ावे तथा दूसरी सामग्री के भौतिक आडिट न होने पर भी सवाल उठाया है। चढ़ावा चोरी के आरोपी टिन्नू यादव, लवकुश, अनुकल्प, करुणेश का भी रिपोर्ट में उल्लेख है। यह पहले से साफ है कि दानपात्रों की चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी। यह भी सही है कि दानपात्र बैंक कर्मियों और कुछ अन्य लोगों की मौजूदगी में खोला जाता था। तमाम तरह के मौखिक आरोपों का उल्लेख है लेकिन दस्तावेजी साक्ष्य नहीं है। जैसे बैंक जाने वाले पैसों में हेराफेरी, आभूषण रत्न की चोरी, चढ़ावे की रकम के गणना के वक्त गड़बड़ी। प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों का भी उल्लेख है। यह तो बताया गया है कि किसकी क्या भूमिका थी लेकिन इस बात का उल्लेख नहीं है कि आरोपों के संबंध में उनकी क्या भूमिका रही। इस बात का भी उल्लेख है कि वस्तुओं की खरीद किन-किन फर्मों से हुई लेकिन अधिक दाम में खरीदने पर कोई टिप्पणी नहीं है। कहा जा रहा है कि संबंधित फर्मों से जब तक पूछताछ नहीं होगी तब तक स्थिति साफ नहीं होगी।

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