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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक फरेबी स्वयंभू ग्रुप।

वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि डोभाल की कलम से

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक फरेबी स्वयंभू ग्रुप है। उसने इसलिए कभी उसका पंजीकरण नही कराया है। पंजीकृत संगठन व संस्था कानून के अनुसार उत्तरदायित्व जिम्मेदारी लेते हैं। उन्हें अपना आय-व्यय का हिसाब रखना होता है। लेकिन संघ ऐसी लम्पट संस्था है। जिसके पास अकूत दौलत और शौहरत पर कोई बही खाता नही है। बंद लिफाफा चलता है जिसे गुरू दक्षिणा कहते हैं। विदेशों में भी उसके बड़े ग्रुप हैं जो बेहिसाब पैसा भेजते हैं कितना आता है केवल गुरूजी ही जानते है क्योंकि उनसे ना कोई हिसाब मांगता है ना कभी वह देते हैं।
इसका देश की समस्याओं से कोई लेना देना है। कानाफूसी कर गायब हो जाना उसका मुख्य काम है। हिंदुत्व के नाम पर, धर्म के नाम पर आडंबर कराना उसका मुख्य काम है लेकिन वह भी वह अपने नाम से नही करता है उसके लिए उसने विभिन्न नामों से अनुषांगिक संगठन बना रखें उनके बीच जाकर संघ के लोग धर्म के आधार पर सांप्रदायिक विभाजनकारी घुट्टी पिलाते हैं। हिंदुओ को दूसरों से डराकर रखना उसका मुख्य काम है। उनमे यह विश्वास पैदा करना कि संघ ही है जो हिंदुत्व की रक्षा कर सकता है और इसके लिए सत्ता पर चाहे जैसे भी हो कब्जा बनाए रखना ही उसका मुख्य उद्देश्य है और यह काम भी वह अपने नाम से नही अपनी राजनीतिक शाखा भाजपा के कंघे पर चढ़कर करता है।
इस संगठन का सबसे बड़ा झूठ राष्ट्रवादी होना है। ऐसा कोई भी संगठन भारत जैसे विविधता वाले देश में सबकुछ हो सकता है पर, राष्ट्रवादी नही हो सकता ? क्योंकि वह भारत की भागीदार एक बड़ी आबादी से अपने राजनीतिक उद्देश्य के घृणा करता है ? इस उद्देश्य के वह देश के युवा मस्तिष्क में नफरत भरने, दंगाई बनाने का अभियान चलाता है लेकिन अपना नाम कभी सामने नही आने देता है।
इस संगठन ने भारत की राजसत्ता पर मजबूत पकड़ बना ली है। उसकी पलटन के लोग राजसत्ता के नीति निर्धारण के शीर्ष तक पहुंच गए हैं। देश जांच ऐजेंसियों का अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसद की सदस्यता समाप्त करने, जांच ऐजेंसियों का डर दिखाकर राजनीतिक दलों को विभाजित कर सत्ता पर नाजायज कब्जा करने, मतदाताओं को घूस देकर चुनाव जीतने, दिल्ली में नगर-निगम बराबर राज्य की सरकार पर कब्जा करने के लिए फर्जी शराब घोटाले का प्रचार अभियान चलाने, लोकप्रिय नेता मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया को अवैध रूप से जेल भिजवाने का फर्जी ताना बाना बनाने से पता चलता है कि उसकी घुसपैठ कहां तक हो गई।
रोजमर्रा के व्यवहार में हम प्रशासनिक, पुलिस तथा कुछ हद न्याययिक अधिकारियों के लहजे में आ रहे बदलाव को समझा जा सकता है। कभी – कभी लगता है कि यह राजसत्ता हमारे प्रति नही किसी और के प्रति जिम्मेदार है?

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