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तो क्या लूट और डकैती से पुलिस को फायदा होता है? आज हर तरफ गूंज रहा है यह सवाल।

मनोज सैनी
हरिद्वार।1 सितंबर को हरिद्वार शहर के सबसे व्यस्तम क्षेत्र चंद्रा चार्य चौक के समीप 6 डकैतों ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को आईना दिखाते हुए सरकारी आंकड़ों के अनुसार 5 करोड़ की बहुत बड़ी डकैती डाली थी। मामला अभी चल ही रहा था कि 3 सितंबर की सुबह सैर पर निकली महिला दीपिका गुप्ता की बाइक पर आए चैन लुटेरे ने गले से लगभग 42 ग्राम की चैन झपट ली।
दोनों घटनाओं को लेकर शहर भर में चर्चा है की डकैती और लूट की घटनाओं से पुलिस को बहुत फायदा होता है। शहर वासियों के बीच पुलिस की कार्य प्रणाली को लेकर जिस प्रकार की चर्चा चल रही है वह बहुत हैरान करने वाली है। चर्चा पर यदि विश्वास किया जाए तो श्री बाला जी ज्वैलर्स के यहां 5 करोड़ नहीं बल्कि 10 करोड़ से ऊपर की डकैती पड़ी है, जबकि पुलिस रिपोर्ट में लगभग 5 करोड़ की डकैती दिखाई गई है।
चर्चा के अनुसार पुलिस यदि डकैतों को पकड़कर डकैतों द्वारा लूटा गया माल बरामद करती है तो लगभग 2 से लेकर ढाई करोड़ का माल दिखाएगी और पीड़ित व्यापारी को सौंप देगी। उसके ऊपर का माल पुलिस अपनी जेब में भर लेगी जिसका फिर बंदर बांट होगा।
शहर में जो चैन लूट की दूसरी घटना घटित हुई उसमें पीड़ित महिला ने बताया कि उसने पुलिस को दी अपनी तहरीर में 42 ग्राम की चैन दिखाई थी, जबकि पुलिस रिपोर्ट में सिर्फ 50 हजार की चैन दर्शाई गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि लूट और डकैती की घटनाएं पुलिस के लिए फायदे का सौदा होता है।

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