विशेष संवाददाता
हरिद्वार। गंगा नदी में अवैध खनन को लेकर जिला व पुलिस प्रशासन पर मिलीभगत के आरोप यूं ही नहीं लगते हैं। जब मिलभगत होती है एक न एक दिन सामने आ ही जाती है। आज हम आपको बतायेंगे भी और दिखायेंगे भी की कैसे राजस्व (जिला प्रशासन) व पुलिस विभाग की सरपरस्ती में रात के अंधेरे में मा गंगा का सीना छलनी किया जा रहा है। आपको बताते चलें कि सामान्य रूप से स्टोन क्रेशर पर नियमानुसार गंगा नदी से उठाया हुआ कच्चा माल 55 से 70 रुपये कुंतल होता है मगर गंगा को चीरकर रात के अंधेरे में उठाया अवैध रूप से बुग्गियों द्वारा उठाया हुआ कच्चा माल क्रेशर वालों को 20 से 25 रुपये कुंतल में मिल जाता है। इसका मतलब सिर्फ एक ही कुंतल पर 30 रुपये का लाभ, जिसका सीधा सीधा हिस्सा 3 जगह बंटता है। स्टोन क्रेशर, जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन।
वीडियो में आप देख सकते है कि किस प्रकार रात के अंधेरे में लगभग 100 से 125 बुग्गियों से गंगा के सीने को चीरकर छलनी किया जा रहा है। यह वीडियो हमारे संवाददाता ने अपनी जान पर खेलकर रात के अंधेरे में ग्राम कटारपुर के पास बनाया है जहां पर एक चर्चित स्टोन क्रेशर रात के अंधेरे में हर रोज इस अवैध कार्य को धड़ल्ले से अंजाम देता है। दिलचस्प बात यह है कि यदि कोई इसकी शिकायत राजस्व (जिला प्रशासन) या पुलिस प्रशासन से फोन पर करता है तो दोनों विभागों के अधिकारी फोन तो दूर की बात, मामले को सुनना भी नहीं चाहते। विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि रात के अंधेरे में मां गंगा के सीने को चीरकर जो अवैध खनन होता है उसमें स्टोन क्रेशर, राजस्व (जिला प्रशासन) व पुलिस प्रशासन बराबर के साझीदार होते हैं और सरकार को सीधा सीधा राजस्व की हानि पहुंचाते हैं। इसी अवैध कमाई के कारण उपरोक्त दोनों विभाग इस प्रकार के मामले को लेकर बात भी करना पसंद नहीं करते हैं। इस प्रकार हर रोज अवैध खनन से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अभी तक सरकार को राजस्व और पुलिस विभाग ने स्टोन क्रेशर मालिकों से मिलकर कितने करोड़ों का चूना लगा दिया है?

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