मनोज सैनी
हरिद्वार। कुम्भ में स्नान करना एक डुबकी नहीं यह तो सार है अध्यात्म का। फिर चाहे आप मां गंगा के चरणों में अपनी श्रद्धा पावन स्नान से अर्पित करो या किसी असहाय को मां गंगा के तट पर पहुँचा कर। कुम्भ मेला पुलिस जो सजग सतर्क और अडिग है अपने कर्तव्य पथ पर। फिर चाहे वो कर्तव्य निर्वहन यातायात प्रबन्धन हो या गंगा घाट पर श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करता जवान सभी का अपना महत्व और गुरुता है। महाकुम्भ अविराम अपने पथ पर अविरल बढ़ रहा है। लाखों की संख्या में श्रद्धालु माँ गंगा में डुबकी लगा खुद को धन्य महसूस कर रहे हैं। वहीं अनेक ऐसे भी श्रद्धालु हैं जो दिव्यांग, बुजर्ग अथवा असहाय होने से सड़क पार कर घाटों में पहुँचने में खुद को असमर्थ महसूस कर रहे हैं। उन सभी को सकुशल पावन स्नान कराने का कार्य कर रहें है कुम्भ मेला पुलिस के जवान। जो प्रतिदिन अनेक भक्तों को सहायता प्रदान कर पावन पर्व में डुबकी लगवा रहे हैं और कर्तव्य निर्वहन के साथ ही मानवीय कार्यों से माँ गंगा का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

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