प्रभुपाल सिंह रावत
रिखणीखाल। आये दिन दुर्गम व सुदूरवर्ती पहाड़ों में बसे निर्बल, दुर्बल तपके के अशिक्षित व मोबाइल के अनजान व्यक्ति जब मुख्य मंत्री हेल्पलाइन नम्बर 1905 पर फोन करते हैं तो पहले तो ये फोन उठता ही नहीं है, यदि गलती से उठा भी लिया तो उधर से आवाज सुनाई देती है कि किसी अन्य काल पर व्यस्त है, थोड़ी देर बाद सम्पर्क करें लेकिन वो थोड़ी देर कभी वापस नहीं आती या फोन कट जाता है या बात पूरी नहीं हो पाती। अब बेचारा जिसे फोन मिलाना भी नहीं आता वो क्या करे? मन मसोटकर चुप रहने में ही भलाई समझता है। अगर बात हो भी जाये तो समाधान नहीं होता। वैसे भी पहाड़ों में संचार नेटवर्किंग मेहमानबाजी की तरह आते हैं और फिर ओझल हो जाते हैं। अब धीरे धीरे पहाड़ों से लोगों का इस 1905 से विश्वास हटता जा रहा है, केवल खानापूर्ति तक ही सीमित रह गया है।



क्या ही अच्छा होता कि उत्तराखंड सरकार इस नम्बर 1905 को या कोई अन्य नम्बर जारी कर उस नम्बर को व्हाटसप मैसेज से आदान-प्रदान करे, ताकि अधिसंख्य लोग मुख्य मंत्री हेल्पलाइन सेवा का लाभ उठा सकें और अपनी बात व मैसेज व्हाटसप के माध्यम से शीर्षस्थ पद पर पहुंचे व्यक्ति तक पहुंचा सके तथा समाधान की कार्रवाई से भी अवगत हो सके तो कुछ बात भी बने।

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