मनोज सैनी
हरिद्वार। जी हां ख़बर की हेडलाइन में जो लिखा है वह सत्य है। प्राप्त जानकारी के अनुसार हरिद्वार निवासी राहुल गिरी अपनी चोटिल बहन को दिखाने पावन धाम स्थित मेला चिकित्सालय में गये जहां की व्यवस्था देखकर वे दंग रह गए। मेला अस्पताल में मेला प्रशासन के दावे के विपरीत व्यवस्थायें देखने को मिली। जैसे ही राहुल गिरी अपनी चोटिल बहन स्वाति को लेकर मेला अस्पताल पहुंचे तो आपातकालीन स्थिति में उनका सामना ऑर्थोपेडिक सर्जन पीके मेहता से हुआ जो शराब के नशे में धुत थे और अपने होशो हवास में नहीं थे और मरीज व उनके सहयोगी से बात करने की स्थिति में भी नहीं थे।
इस बाबत जब राहुल गिरी ने मेलाधिकारी स्वास्थ्य से वार्ता की तो उन्होंने भी शराबी डॉक्टर का पक्ष लेते हुए उलटे राहुल गिरी को देख लेने की धमकी दे डाली और कहा कि जो तुमसे जो बन पड़ता हो कर लेना। इतना सब होने के बाद अपनी बहन स्वाति जिसके हाथ में फ्रेक्चर था राहुल वापिस आ गया। उस सब मामले की उसने एक वीडियो भी बना ली। अब बड़ा सवाल यह है कि आये दिन मेला प्रशासन से लेकर उत्तराखण्ड शासन में बैठे आला अधिकारी रोज निरीक्षण करते पाए जाते है लेकिन जब धरातल पर उसको परखने की बारी आती है तो शून्य ही दिखाई देता है। बकौल राहुल गिरी का कहना है कि मेला अस्पताल में एक्स रे मशीन तक नहीं है। जिस अस्पताल में प्रारंभिक चिकित्सा सुविधा ही न हो तो वह अस्पताल कुम्भ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की चिकित्सा सुविधा दे पाएगा।

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