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चंपावत गैंगरेप प्रकरण: चम्पावत पुलिस का दावा बच्ची के साथ नहीं हुआ गैंगरेप।

ब्यूरो

चंपावत। चंपावत के कथित दुष्कर्म प्रकरण में पुलिस की जांच में साजिश का खुलासा हुआ है। जांच में बदले की भावना से नाबालिग को बहला-फुसलाकर सुनियोजित षड्यंत्र रचने की बात सामने आई है।

6 मई को वादी द्वारा एक लिखित तहरीर प्रस्तुत कर अवगत कराया गया कि 5 मई की रात्रि उसकी 16 वर्षीय नाबालिग पुत्री के साथ तीन व्यक्तियों द्वारा दुष्कर्म किया गया है। प्राप्त तहरीर के आधार पर कोतवाली चम्पावत में तत्काल पोक्सो एक्ट के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया।

मामले की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए SP चंपावत श्रीमती रेखा यादव द्वारा तत्काल क्षेत्राधिकारी चम्पावत के पर्यवेक्षण में 10 सदस्यीय एसआईटी का गठन कर निष्पक्ष एवं गहन विवेचना करने के निर्देश दिए गए। SP द्वारा स्वयं पीड़िता से बातचीत कर और घटनास्थल पर जाकर स्थानीय लोगों से वार्ता कर घटना की जानकारी ली गई।

एसआईटी द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्यों को संरक्षित किया गया तथा RFSL ऊधमसिंह नगर की फील्ड यूनिट को मौके पर बुलाकर वैज्ञानिक तरीके से घटनास्थल का परीक्षण कराया गया।

पीड़िता का तत्काल मेडिकल परीक्षण, CWC के समक्ष काउंसलिंग एवं न्यायालय के समक्ष बयान दर्ज कराए गए। पीड़िता की देख रेख एवं सुरक्षा हेतु जिलाधिकारी से पत्राचार कर एक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया।

विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पीड़िता ग्राम सल्ली में विवाह समारोह में अपनी इच्छा से अपने दोस्त के साथ गई थी। घटना के दिन पीड़िता का विभिन्न स्थानों पर आवागमन एवं गतिविधियां सीसीटीवी फुटेज व सीडीआर से सत्यापित हुई हैं।

चिकित्सीय परीक्षण में किसी प्रकार की वाह्य अथवा आंतरिक चोट, संघर्ष अथवा जबरदस्ती के स्पष्ट चिकित्सीय संकेत प्राप्त नहीं हुए हैं। कुछ गवाहों के बयान तकनीकी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मेल खाते नहीं पाए गए, जिससे घटनाक्रम की सत्यता प्रमाणित नहीं होती है।

कमल रावत, पीड़िता एवं पीड़िता की महिला मित्र के मध्य घटना तिथि पर असामान्य रूप से बार-बार संपर्क/वार्तालाप पाया गया है, जो प्रकरण के घटनाक्रम के संबंध में महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करता है।

घटना के दौरान नामजद व्यक्तियों विनोद सिंह रावत, नवीन सिंह रावत और पूरन सिंह रावत की मौजूदगी घटनास्थल पर नहीं पाई गई। गवाहों के बयानों व तकनीकी साक्ष्यों से इस बात की पुष्टि हुई कि घटना के दौरान नामजद व्यक्ति मौके पर नहीं थे।

कमल रावत द्वारा बदले की भावना से प्रेरित होकर एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत नाबालिग बालिका को झूठा प्रलोभन व बहला-फुसलाकर अपने बदले की पूर्ति हेतु षडयंत्र रचा गया था।

एसपी ने बताया कि विवेचना के दौरान पुलिस द्वारा प्रत्येक तथ्य का वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष परीक्षण किया गया है। मामले में किसी भी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित न किया जाए तथा दोषी के विरुद्ध विधिक कार्रवाई सुनिश्चित हो, इस उद्देश्य से सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच जारी है।

वर्तमान में डिजिटल एवं फॉरेंसिक साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण प्रगति पर है। संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ एवं अन्य साक्ष्यों का संकलन जारी है। यदि जांच के दौरान तथ्यों को भ्रामक/मनगढ़ंत पाया जाता है, तो विधि अनुसार सुसंगत धाराओं में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा महिला एवं बाल अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाती है। साथ ही, किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना/झूठे आरोपों को भी गंभीरता से लेते हुए विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने आम जनमानस एवं मीडिया बंधुओं से अनुरोध किया है कि प्रकरण की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए केवल सत्यापित तथ्यों का ही प्रकाशन/प्रसारण करें।

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