मनोज सैनी
हरिद्वार। ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में आज अनुपमा रावत ने संत शिरोमणि गुरु श्री रविदास जी की जयंती पर दो दर्जन से ज्यादा कार्यक्रमों में भाग लिया, सबसे पहले अनुपमा रावत मिस्सरपुर पहुंची, जहां उन्होंने रविदास मंदिर में झाड़ू लगाकर सेवा की माथा टेक कर प्रसाद लिया, उसके बाद अनुपमा रावत पंजनहेड़ी, अजीतपुर, जियापोता, कटारपुर, फेरूपुर ,बिशनपुर, धनपुरा पहुंची,
इसके बाद अनुपमा रावत बादशाहपुर पहुंची, जहां पर रविदास मंदिर में माथा टेक कर वहां पर सेवा की और लंगर भी चखा, इसके अलावा अनुपमा रावत पूरे विधानसभा क्षेत्र में इब्राहिमपुर, पुरुषोत्तम नगर, अंबु वाला , सराय ,श्यामपुर, गाजीवाली, ग्राम कांगड़ी बाहर पीली , चमरिया, डालू पुरी और मीठी बेरी पहुंच कर रविदास मंदिरों में पहुंची,
चुनाव के बाद अन्य प्रत्याशी अपने घरों में आराम कर अपनी थकान मिटा रहे हैं वही अनुपमा रावत चुनाव में जनता से किए गए बेटी,बहन के रिश्ते निभाने का वादा पूरा करते हुए क्षेत्र में जनता के बीच जा रही हैं।
अनुपमा रावत ने संत रविदास जी के जीवन के जीवन और सिद्धांतों के बारे मे लोगो को बताते हुए कहा कि संत शिरोमणि बहुत ही दयालु और दानवीर थे। संत रविदास ने अपने दोहों व पदों के माध्यम से समाज में जातिगत भेदभाव को दूर कर सामाजिक एकता पर बल दिया और मानवतावादी मूल्यों की नींव रखी। रविदासजी ने सीधे-सीधे लिखा कि ‘रैदास जन्म के कारने होत न कोई नीच, नर कूं नीच कर डारि है, ओछे करम की नीच’ यानी कोई भी व्यक्ति सिर्फ अपने कर्म से नीच होता है। जो व्यक्ति गलत काम करता है वो नीच होता है। कोई भी व्यक्ति जन्म के हिसाब से कभी नीच नहीं होता। संत रविदास ने अपनी कविताओं के लिए जनसाधारण की ब्रजभाषा का प्रयोग किया है। साथ ही इसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और रेख्ता यानी उर्दू-फारसी के शब्दों का भी मिश्रण है। रविदासजी के लगभग चालीस पद सिख धर्म के पवित्र धर्मग्रंथ ‘गुरुग्रंथ साहब’ में भी सम्मिलित किए गए है।

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