श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ ? चढ़ावे के इस्तेमाल पर बीकेटीसी कटघरे में
ब्यूरो
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) धामों में तीर्थ यात्रियों को सुविधा तो नहीं दे पा रही है। मगर श्रद्धालुओं के दान-चढ़ावे के पैंसे की मनमाने तरीके से बंदरबांट करने में लगी हुई है। गत वर्ष केदारनाथ के तीर्थ-पुरोहितों की संस्था केदार सभा द्वारा बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का विरोध किए जाने के बाद उन्हें नियम विरुद्ध तरीके से ग्यारह लाख रूपये का भुगतान कर दिया गया।
बीकेटीसी में व्याप्त भ्रष्टाचार के मुद्दों को लगातार उठा रहे सामाजिक कार्यकर्त्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर यह आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में तीर्थ पुरोहितो की संस्था ‘केदार सभा’ ने वर्ष 2013 की आपदा में दिवंगत आत्माओं की शांति हेतु केदारनाथ धाम में श्रीमद भगवत कथा का आयोजन किया था। कथा का आयोजन 25 जुलाई से 01 अगस्त, 2025 तक हुआ था।
अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने बताया कि आयोजन संपन्न होने के करीब ढाई माह बाद 12 अक्टूबर, 2025 को आनन-फानन वाले अंदाज में बीकेटीसी के सहायक लेखाकार और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के स्तर से अलग-अलग नोट शीट तैयार की गईं। प्रशासनिक अधिकारी के स्तर से तैयार नोट शीट में कथा का आयोजन किये जाने के दृष्टिगत केदार सभा के अनुरोध पर ग्यारह लाख रुपये की स्वीकृति के संबंध में आख्या दी गई। इस नोट शीट पर तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी विजय थपलियाल समेत उपाध्यक्ष विजय सिंह कप्रवाण व अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के हस्ताक्षर हैं।
सहायक लेखाकार वाली नोट शीट में आयोजन संपन्न होने का उल्लेख करते हुए ग्यारह लाख रुपये स्वीकृत करने के बारे में आख्या दी गई है। नोट शीट में सहायक लेखाकार से लेकर मुख्य कार्याधिकारी व उपाध्यक्ष कप्रवाण के हस्ताक्षर हैं। सभी ने अपने हस्ताक्षरों के साथ 12 अक्टूबर, 2025 की तिथि अंकित की है।
अधिवक्ता विकेश नेगी ने बताया कि आश्चर्य की बात है कि दोनों नोट शीट और बिल में कहीं पर भी बीकेटीसी में नियुक्त वित्त नियंत्रक की सहमति नहीं ली गई, जो कि पूरी तरह से वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा नोट शीट में केवल यह उल्लेख किया गया है कि केदार सभा ने आर्थिक सहयोग का अनुरोध किया है। मगर यह उल्लेख नहीं है कि केदार सभा ने लिखित में अनुरोध किया अथवा मौखिक ? यदि केदार सभा ने लिखित में अनुरोध किया था तो वह पत्र आरटीआई में उपलब्ध नहीं कराया गया।
अधिवक्ता विकेश नेगी ने कहा कि विगत वर्ष 10 अक्टूबर को केदार सभा ने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की कार्यशैली के खिलाफ आक्रोश जताते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की थी। केदार सभा ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को बाकायदा पत्र लिख कर आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध होने के दो दिन बाद आनन-फानन में जिस तरह से केदार सभा को 11 लाख की धनराशि स्वीकृत की गयी, उससे यह स्पष्ट है की अध्यक्ष द्वारा बीकेटीसी के धन को अपने व्यक्तिगत प्रबंधन में खर्च किया गया।
अधिवक्ता विकेश नेगी ने मंदिरों के धन और दान- चढ़ावे के दुरूपयोग को श्रद्धालुओं की आस्था के साथ गहरा छल बताया और कहा कि ऐसा लगता है कि बीकेटीसी अध्यक्ष यात्रा व मंदिरों के प्रबंधन के बजाय अपने व्यक्तिगत प्रबंधन में लगे हुए हैं। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

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